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उत्तर प्रदेश, 19 मई (राहुल चौधरी) : लोकसभा चुनाव के सभी चरण के मतदान खत्म होने के बाद एग्जिट पोल के नतीजे सामने आ गए हैं। यूपी में बीजेपी को नुकसान का अनुमान बताया जा रहा है। एग्जिट पोल के मुताबिक, महागठबंधन को करीब 40 सीटों का फायदा हो सकता है। यानी यूपी में बीजेपी को करीब 30-35 सीटों का नुकसान हो सकता है और उसका फायदा सपा-बसपा गठबंधन उठा सकता है। टीवी चैनलों ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक बसपा-सपा महागठबंधन बीजेपी की सीटों में सेंधमारी करती दिख रही है.  बता दें कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के फाइनल नतीजे कैसे आएंगे इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। हालांकि, एग्जिट पोल से एक इशारा मिल गया है और एग्जिट पोल में उम्मीद की जा रही है कि इस बार यूपी में बसपा-सपा गठबंधन ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी है।

गौरतलब है कि यूपी में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें हैं और किसी भी पार्टी के लिए सरकार बनाने में यह निर्णायक साबित होती हैं। यही वजह है कि राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से ही होकर गुजरता है। यूपी में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय दिखा। लोकसभा चुनाव 2019 में सपा-बसपा ने अप्रत्याशित गठबंधन कर और कांग्रेस को अलग रख सबको चौंका दिया था। इस सपा-बसपा गठबंधन ने रायबरेली और अमेठी की दो सीटों को छोड़कर सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और बीजेपी को कड़ी टक्कर दी। वहीं कांग्रेस भी यूपी में मजबूत दावेदारी की कोशिश करती दिखी। इस तरह से देखा जाए तो बीजेपी के सामने गठबंधन के साथ-साथ कांग्रेस से भी पार पाने की चुनौती थी। यूपी में 2014 का परिणाम दोहराने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंकी, वहीं सपा-बसपा ने केंद्र की सियासत को ध्यान में रखते हुए कड़ी चुनौती दी।

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 80 में से अप्रत्याशित 71 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। कुल मिलाकर एनडीए को 73 सीटें मिलीं थी। कांग्रेस को दो और सपा को 5 सीटें नसीब हुई। उस चुनाव में बसपा को एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी। यही वजह है कि बसपा सुप्रीमो मायावती गठबंधन को लेकर सकारात्मक दिखीं। इस बार भी बीजेपी को कुछ ऐसे परिणाम की ही उम्मीद होगी। हालांकि, पूरी तस्वीर तो 23 मई को ही साफ होगी, मगर एग्जिट पोल से एक तरह से एक अनुमान मिल जाएगा। तो चलिए जानते हैं कि औपचारिक नतीजों से पहले क्या कहते हैं एग्जिट पोल के आंकड़े।

यूपी में इस बार काफी सियासी उठा-पटक देखने को मिला। कई नेताओं ने दल बदले तो कईयों को टिकट भी नहीं मिले। बीजेपी ने अपने कई उम्मीदवारों पर इस बार दांव नहीं खेला। उनकी जगह पर कई नए चेहरो को जगह दी। इसके अलावा, बीजेपी ने अखिलेश यादव के खिलाफ दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को उतारकर तो गोरखपुर से अभिनेता रविकिशन को उतार कर चुनाव को और दिलचस्प बना दिया।

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