हिन्दुस्तान24.लाइव

नई दिल्ली, 19 मई (राहुल चौधरी) : एग्जिट पोल के रुझान जल्‍द ही आने लगे हैं। इससे अनुमान लग रहा है कि किस पार्टी को कितनी बढ़त मिल रही है। Lok Sabha Election 2019 के तहत सातवें चरण के मतदान में 60 फीसद से ज्‍यादा मतदान हुआ है। इसके साथ ही करीब डेढ़ महीने से चली आ रही चुनावी प्रक्रिया पर विराम लग गया है। मतदान खत्म होते ही एग्जिट पोल के रुझान आने शुरू हो गए। बता दें कि चुनाव परिणाम तो 23 मई को ही आएंगे, लेकिन एग्जिट पोल से भावी सरकार की एक तस्वीर तो बनती दिखती ही है

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी 25 में से 23 सीट जीत सकती है। वहीं, कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।

कुल 542 सीटों में से 123 पर रुझान आ चुके हैं। यहां यूपीए को 53 एनडीए को 29 और अन्‍य को 41 सीटें मिलती नजर आ रही हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को 287, यूपीए को 128 और अन्‍य को 87 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। हालांकि, यहां भी एनडीए सरकार बनाती नजर आ रही है। कांग्रेस के दावे यहां भी फीके पड़ते दिख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में महागठबंधन भारी बढ़त बनाता दिख रहा है और भारतीय जनता पार्टी को झटका लग रहा है। उत्‍तर प्रदेश में इस बार बसपा और सपा एक साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरे हैं।

– महाराष्‍ट्र में एनडीए को एग्जिट पोल में नुकसान होता दिख रहा है। 48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में एडीए ने पिछली बार 42 सीटें जीती थीं और यूपीए को 6 सीटें मिली थीं। हालांकि, इस बार NDA को 38 सीटों (-4) से ही संतोष करना पड़ सकता है, जबकि यही नुकसान UPA में बढ़त के तौर पर जुड़कर उसकी सीटों की संख्या 10 तक (+4) पहुंचा सकता है।

29 सीटों वाले मध्य प्रदेश में 2014 में बीजेपी को 27 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। इस बार राज्य की सत्ता भले ही कांग्रेस को मिल गई हो पर वह लोकसभा चुनावों में बीजेपी का ज्यादा नुकसान नहीं कर सकी है। इस बार BJP को 21 और कांग्रेस को 8 सीटें मिल सकती हैं।

40 सीटों वाले बिहार में NDA की सीटें घट सकती हैं। यहां कांग्रेस की अगुआई वाले UPA को पिछले चुनाव की तुलना में सीधे तौर पर 5 सीटों का फायदा होता दिख रहा है। 42.78 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस+ को 15 सीटें मिल सकती हैं, जबकि 2.98 फीसद वोट शेयरों की कमी के साथ (48.52%) BJP+ को 25 सीटें मिल सकती हैं।

यूपीए को 132 सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है।

एनडीए को पूर्ण बहुमत मिलता नजर आ रहा है। इस सर्वे में 306 सीटें मिलने का दावा किया जा रहा है। रुझानों में अन्‍य को 104 सीटें मिलने का दावा किया है।

पिछले लोकसभा चुनाव में अधिकतर एग्जिट पोल में दावा किया गया था कि एनडीए, 10 साल से सत्तारूढ़ कांग्रेस को सत्ता से बाहर करने में सफल होगी। हालांकि एक एजेंसी के अलावा किसी ने बीजेपी की इतनी बड़ी जीत का दावा नहीं किया था। उस वक्त एग्जिट पोल में कांग्रेस को करीब 100 सीट मिलने का दावा किया गया था, लेकिन कांग्रेस 44 पर सिमट गई। वहीं बीजेपी को अनुमान से परे 282 और एनडीए को 336 सीटें मिलीं थीं। बता दें एजेंसी ने बीजेपी को 291 और एनडीए को 340 सीटें मिलने का अनुमान लगाया था।

एग्जिट पोल के रिजल्ट और वोटिंग के असली रिजल्ट कभी कभी समानांतर चलते हैं तो कभी बिल्कुल अलग हो जाते हैं। तमिलनाडु चुनाव 2015, बिहार विधानसभा 2015 में यग गलत साबित हुए थे। वहीं साल 2004 लोकसभा चुनाव में सभी एग्जिट पोल फेल हुए और कांग्रेस ने सरकार बनाई। उसके बाद साल 2014 में सही साबित हुए, क्योंकि लोक सभा चुनाव में मोदी लहर का अनुमान एग्जिट पोल्स में दिखा था।

हिन्दुस्तान24.लाइव के साथ खास बातचीत में C-Voter के यशवंत देशमुख ने एग्जिट पोल करवाने और उसकी सत्यता को लेकर बातचीत की। उन्होंने एग्जिट पोल, उसके सैंपलर साइज, सीटों के निर्धारण को लेकर बात की। ज्यादा से ज्यादा लोग तक पहुंचना हमारा उद्देश्य होता है। साढे पांच लाख से अधिक मतदाताओं से बात करके देश का रुझान तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि सटीक रुझान हासिल करने के लिए हर वर्ग के आधार पर साक्षात्कार किए जाते हैं।

चुनावी सर्वे से होकर ही एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आते हैं। एग्जिट पोल में एक सर्वे के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आखिर चुनाव परिणाम किसके पक्ष में आ रहे हैं। एग्जिट पोल हमेशा वोटिंग पूरी होने के बाद ही दिखाए जाते हैं। इसका मतलब यह है कि सभी चरण के चुनाव होने के बाद ही इसके आंकड़े दिखाए जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हर चरण के बाद एक्जिट पोल दिखा दिया जाए। वोटिंग के दिन जब मतदाता वोट डालकर निकल रहा होता है, तब उससे पूछा जाता है कि उसने किसे वोट दिया। इस आधार पर किए गए सर्वेक्षण से जो व्यापक नतीजे निकाले जाते हैं, इसे ही एग्जिट पोल कहते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 फरवरी 1967 को पहली बार नीदरलैंड में इसका इस्तेमाल किया था।

 ऐसा रहा चरण वार मतप्रतिशत
लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 69.50 फीसद मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 69.44 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तीसरे चरण में 68.40 फीसद वोटर मतदान केंद्रों तक पहुंचे और चौथे चरण में 65.51 लोगों ने मतदान किया। पांचवें चरण में 64.21 फीसद लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया जबकि छठे चरण में 63.48 फीसद मतदान हुआ।

सातवें चरण का मतदान – 19 मई
आखिरी चरण में 19 मई को आठ राज्यों की 59 लोकसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। मतदान के अंतिम चरण में कुल 918 उम्मीदवार चुनाव मैदान में। आखिरी चरण में पंजाब और उत्तर प्रदेश की 13-13, पश्चिम बंगाल की नौ, बिहार व मध्य प्रदेश की आठ-आठ, हिमाचल की चार, झारखंड की तीन और चंडीगढ़ की इकलौती सीट पर मतदान हो रहा है।

छठे चरण का मतदान – 12 मई
लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 12 मई को राजधानी दिल्ली की सभी सात सीटों समेत सात राज्यों की 59 लोकसभा सीटों के लिए 63.48 फीसद मतदान हुआ। दिल्ली में 60.21 फीसद वोटिंग हुई। हालांकि, पिछली बार यहां 65 फीसद मतदान हुआ था। हिंसा के बीच इस चरण में भी सबसे ज्यादा मतदान पश्चिम बंगाल में हुआ। छठे चरण के मतदान के साथ ही लोकसभा की 543 सीटों में से 483 सीटों के लिए मतदान खत्म हो गया।

पांचवें चरण का मतदान – 6 मई
बंगाल में हिंसा की घटनाओं के बीच सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। सात राज्यों की 51 सीटों पर औसत 62.5 फीसद मतदान हुआ। बंगाल में इस चरण में भी लगभग 74 फीसद वोट पड़े। मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड में भी अच्छा मतदान हुआ। वहीं बिहार व उत्तर प्रदेश में कुछ कम वोट पड़े। जम्मू-कश्मीर में लद्दाख सीट के लिए 64 फीसद मतदान हुआ। पांचवें चरण का मतदान खत्म होने के साथ ही लोकसभा की 543 सीटों में से 424 सीटों पर चुनाव संपन्न हो गया।

चौथे चरण का मतदान – 29 अप्रैल
लोकसभा चुनाव 2019 के चौथे चरण के लिए नौ राज्यों की 72 संसदीय सीटों पर वोटिंग हुई। चुनाव आयोग के अनुसार, चौथे चरण में 64 फीसदी मतदान हुआ। पश्चिम बंगाल में सबसे ज्‍यादा 66.46 फीसद मतदान दर्ज किया गया। महाराष्ट्र की 17, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की 13-13, पश्चिम बंगाल की आठ, मध्य प्रदेश और ओडिशा की 6-6, बिहार की 5 और झारखंड की 3 सीटों पर मतदान हुआ। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग लोकसभा सीट पर भी मतदान हुआ। अनंतनाग सीट पर तीन चरणों में मतदान कराया गया।

तीसरे चरण का मतदान – 23 अप्रैल
लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 13 राज्यों व दो केंद्र शासित प्रदेशों की 117 सीटों के लिए लगभग 66 फीसद वोट पड़े। पश्चिम बंगाल में कई जगह भारी हिंसा के बीच सर्वाधिक 80 फीसद मतदान दर्ज किया गया था। तीसरे चरण में मुर्शिदाबाद के बालीग्राम में बूथ के बाहर दो गुटों में भिड़ंत हो गई, जिसमें मतदान कर वापस लौट रहे तियारुल शेख की मौत हो गई।

दूसरे चरण का मतदान – 19 अप्रैल
दूसरे चरण में एक केंद्र शासित प्रदेश सहित कुल 12 राज्यों की 95 लोकसभा सीटों पर मतदान हुआ। इस चरण में 66 फीसद मतदान दर्ज किया गया।  दूसरे चरण में लोकसभा की 97 सीटों पर चुनाव होने थे, लेकिन तमिलनाडु की वेल्लोर सीट पर बड़े पैमाने पर नकदी जब्त होने के बाद यहां का चुनाव रद कर दिया गया था। उधर, कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को देखते हुए त्रिपुरा पूर्व सीट का चुनाव स्थगित कर दिया गया।

पहले चरण का मतदान – 11 अप्रैल
18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 91 सीटों पर हुआ मतदान। आंध्र प्रदेश में हिंसा के कारण तीन लोगों की मौत। कुल 14 करोड़ मतदाताओं में से इस चरण में 58 से 60 फीसद ने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
– चुनाव आयोग ने एग्जिट पोल्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। इसके मुताबिक चुनाव खत्म होने के आधे घंटे बाद ही एग्जिट पोल्स जारी किए जा सकते हैं।
– एग्जिट पोल एक तरह का सर्वे होता है जिसे कुछ कंपनियां और संस्थान मिलकर कराते हैं। वोट देकर निकलने के ठीक बाद मतदाताओं से पूछा जाता है कि उन्होंने किसे वोट दिया।
– 11 अप्रैल से शुरू हुआ मतदान 19 अप्रैल तक 7 चरणों में हुआ।
– एग्जिट पोल सीधे तौर पर संकेत देते हैं कि अगली सरकार किसकी होने वाली है। हालांकि, ये जरूरी नहीं कि एग्जिट पोल ठीक ही हों कई बार ये गलत भी साबित हुए हैं।

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